आयाम
मंगलवार, 29 मार्च 2011
aayam
आज मैं अपने विचारों को एक आयाम देने जा रही हूँ
मन मैं उठती उमंगो को पंख देने जा रही हूँ
मुझे आपसे यही उम्मीद है कि इन पंखो को
आप ही सही राह दिखाए
एक लेखक के कलम की स्याही बन जाएँ
एक पर्वत पर दीप जलना चाहती है यह
दीपगिरी
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