शनिवार, 3 सितंबर 2011

ठहराव

क्या नदिया  भी रुक जाना चाहती है 
क्या लहरें भी झुक  जाना चाहती है
बादल भी थक जातें है बरसकर 
तूफान भी लोट जाता है गरजकर 
जिंदगी भी चाहती है ठहराव
अब भिखरे हुए आँगन को 
समेटना चाहती है ये माँ
बाग़ मैं फैले  हुए फूलों की 
इक माला बनाना चाहती हूँ  
बच्चों को आँचल मैं छुपाना चाहती हूँ
अब इस बहाव को रोकना चाहती हूँ
हर नदी अब अपना रास्ता बदलकर 
इस सागर मैं आ जाये 
बस  यही चाहती हूँ मैं
बस इस जिंदगी का ठहराव
 चाहती हूँ मैं

रविवार, 29 मई 2011

उड़ान

जिंदगी ठहर सी गयी 
आशाएं भी सो गयी है 
परिंदे उड़ गए है                                                                            
चिड़िया टकटकी लगाये क्यों बेठी है 
चिड़िया ने एक एक दाना मुख मैं डाल
बड़ा किया अपने परिंदों को 
इस उम्मीद से क़ि वे बहुत उचीं
उड़ान भरेंगे आसमान मैं 
सबसे उचें रहेंगे सदा 
लेकिन अब क्यों तुम बेठी हो
टकटकी लगाये 
बरगद का ये पेड़ नहीं भाये अब उनको 
उचीं इमारतों क़ी अटरिया मैं 
घोसंला बनाया है तेरे परिंदों ने 
क्यूँ क्यूँ तुने उन्हें उड़ना सिखाया 
क्यूँ बेठी है तू अब टकटकी लगाये 
ये विशाल वृक्ष क्यूँ लगे तुझे सूना
जब आएगी मौसम मैं बहार 
तुझसे मिलने आयेंगे तेरे परिंदे 
कुछ पल खुशियों के तेरे दामन मैं डालकर 
फिर उड़ जायेंगे तुझे अकेला छोड़कर 
पर फिर भी हर चिड़िया अपने परिंदों को 
उड़ना सिखाती है 
देती है आशीर्वाद उचीं उड़ान भरने के लिए 
फिर क्यूँ बेठी है तू टकटकी लगाये 

                                 दिपगीरी

शनिवार, 7 मई 2011

श्रधांजलि

माँ मुझे बहुत प्यारी थी 
पर वक़्त  ना बिताया इतना माँ के संग 
सदा इंतजार किया उस वक़्त का                          
जो बड़ा बेफवा  होता है हरदम 
पहले आगे की पदाई  के लिए 
हो गयी माँ से दूर मैं
पदाई  पूरी होते ही  शादी हो गयी मेरी
फिर हो गयी माँ से दूर मैं 
माँ बन कर बच्चो की परवरिश मैं
बीत गया समय पंख लगाकर 
बच्चो को पढने के लिए बाहर भेजा
तब हुआ अहसास माँ से दूर होने का 
सोचा अब वक़्त  मेरे साथ वफ़ा करेगा 
माँ के साथ अब वक़्त बिताउंगी
बचपन का सारा प्यार अब मैं पाऊँगी 
पर भगवान को भी माँ की जरुरत थी 
माँ को अपने पास बुला लिया 
वक़्त ने मुझे फिर रुला दिया
पर अब हर बेटी को मेरा ये सन्देश है 
वक़्त का ना करना इंतजार 
माँ के प्यार को कभी ना देना खोने 
अनमोल है माँ का प्यार 
एक बेटी के दिल से निकली 
एक माँ के लिए सच्ची  श्रधांजलि 
माँ  अगले जनम में मैं आपकी ही बेटी बनूँ 
           विज्जू (दीप गिरी )

शुक्रवार, 6 मई 2011

माँ


                                                            
            माँ    देवी  है  पवित्रता  का रूप 
            माँ  धरती है सब्र  का  प्रतिरूप 
            माँ  सागर है  सच्चे  प्यार  का 
            माँ रूप है साहस और वीरता का 
           माँ मूर्ति है सादगी और त्याग की 
           माँ राह है  अटल  सच्चाई  की 
          माँ वृक्ष  है  प्यार  की  छाँव  का  
          माँ  ठण्ड में सूरज की  गर्मी  है 
          माँ गर्मी में चांदनी की ठंडक है 
          माँ जीवन  है  हम  बच्चो  का 
            माँ  ही   हमारी   हमराज   है 
          माँ   में हमारा   बचपन      है 
         माँ  तुझसे  ही  यह  जीवन है 
                          


गुरुवार, 21 अप्रैल 2011

प्यार का तोहफा

शादी की 25 वीं   वर्षगांठ  पर 
पत्नी की तोहफे की मांग पर 
पति ने बड़े प्यार से कहा 
आज हम  हमसफ़र हैं 
यह तोहफा क्या कम है 
25 वीं वर्षगांठ मुबारक हो 
दुआ है 50 वीं वर्षगांठ पर 
मुझे मिले साथ तुम्हारा 
दिखावा नहीं कर पाता हूँ 
यथार्थ पर जीता हूँ मैं 
तोहफे की तुम्हारी मांग पर 
"माँग" मैं सिंदूर  हो हमेशा 
यही दुआ करता हूँ मैं 
           दीपगीरी




बुधवार, 13 अप्रैल 2011

मेरी बिटिया रानी

याद है मुझको आज भी वो दिन 
जब तुम मेरे जीवन में आई 
10 अप्रैल 1990 मंगलवार का वो दिन 
जब देवी माँ खुद मेरे सपने में आई 
एक ऐसा उपहार माँ मुझे दे गयी 
मेरा जीवन रोशन हो गया 
याद है मुझको आज भी वो दिन 
नरम नरम गौरे गौरे हाथ तुम्हारे 
छूने पर एक प्यारा सा अहसास 
दौढ़ गया मेरे रग़ रग़ में 
मुझे लगा मेरा  बचपन मुझे ही दिखाने
भगवान ने  भेजी है  कोई परी 
याद है मुझको आज भी वो दिन 
आखों से निकले वो दो आसूं 
जो ख़ुशी से छलक आये थे 
तुम्हारे नरम हाथों पर जा गिरे 
अहसास तुम्हे माँ के प्यार का 
इन आसुंओं ने दिया होगा 
याद है मुझको आज भी वो दिन 
ख़ुशी से मेरा मन झूम झूम उठा था 
हर तकलीफ को भुला दिया था मैंने 
कैसे वक़्त गुजरा तुम बड़ी हो गयी 
अपने सपनो को पूरा करने मुझसे दूर हो गयी  
उसी देवी माँ पर विश्वास है मुझे 
सदा तुम्हारे जीवन में खुशियाँ भरे 
हर जनमदिन तुम्हारा खुशियों  से भरा हो 
जन्मदिन मुबारक हो ----------
याद है मुझको आज भी वो दिन 
गलों पर तुम्हारे चूमकर तुम्हे 
प्यार किया करती थी में 
इस जनमदिन पर क्या उपहार दूँ 
कुछ शब्द लिखकर आज 
अपना प्यार तुम तक पहुँचाने की
कोशिश बस कर रही हूँ में 
हर सपना तुम्हारा पूरा हो 
यही दुआ देवी माँ से करती हूँ में 
तुम्हारी    मम्मी  
दीपगिरी 

रविवार, 3 अप्रैल 2011

जीवन


जीवन दिया है भगवान ने ,
सहेजा है इसे माता पिता ने 
सवारां  है  इसे  गुरु   ने 
अब  बारी  है  तुम्हारी 
क्या   सोचा   है  तुमने 
शिक्षा पूरी करके आये हो तुम 
जीवन को सार्थक करने की 
अब  बारी  है  तुम्हारी 
व्यर्थ न जाने देना सबकी मेहनत
करना  कुछ  ऐसा  काम
जिसमें हो माता पिता की ख़ुशी 
भगवान का हो आशीर्वाद 
गुरु का गर्व से हो ऊँचा सीना 
अब  बारी  है  तुम्हारी 

मंगलवार, 29 मार्च 2011

aayam

आज मैं अपने विचारों को एक आयाम देने जा रही हूँ 
मन मैं उठती उमंगो को  पंख देने जा रही हूँ  
मुझे आपसे यही उम्मीद है कि इन पंखो को 
आप ही सही राह दिखाए 
एक लेखक के  कलम की स्याही बन जाएँ 
एक पर्वत पर दीप जलना चाहती है यह 
             दीपगिरी