रविवार, 3 अप्रैल 2011

जीवन


जीवन दिया है भगवान ने ,
सहेजा है इसे माता पिता ने 
सवारां  है  इसे  गुरु   ने 
अब  बारी  है  तुम्हारी 
क्या   सोचा   है  तुमने 
शिक्षा पूरी करके आये हो तुम 
जीवन को सार्थक करने की 
अब  बारी  है  तुम्हारी 
व्यर्थ न जाने देना सबकी मेहनत
करना  कुछ  ऐसा  काम
जिसमें हो माता पिता की ख़ुशी 
भगवान का हो आशीर्वाद 
गुरु का गर्व से हो ऊँचा सीना 
अब  बारी  है  तुम्हारी 

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