रविवार, 29 मई 2011

उड़ान

जिंदगी ठहर सी गयी 
आशाएं भी सो गयी है 
परिंदे उड़ गए है                                                                            
चिड़िया टकटकी लगाये क्यों बेठी है 
चिड़िया ने एक एक दाना मुख मैं डाल
बड़ा किया अपने परिंदों को 
इस उम्मीद से क़ि वे बहुत उचीं
उड़ान भरेंगे आसमान मैं 
सबसे उचें रहेंगे सदा 
लेकिन अब क्यों तुम बेठी हो
टकटकी लगाये 
बरगद का ये पेड़ नहीं भाये अब उनको 
उचीं इमारतों क़ी अटरिया मैं 
घोसंला बनाया है तेरे परिंदों ने 
क्यूँ क्यूँ तुने उन्हें उड़ना सिखाया 
क्यूँ बेठी है तू अब टकटकी लगाये 
ये विशाल वृक्ष क्यूँ लगे तुझे सूना
जब आएगी मौसम मैं बहार 
तुझसे मिलने आयेंगे तेरे परिंदे 
कुछ पल खुशियों के तेरे दामन मैं डालकर 
फिर उड़ जायेंगे तुझे अकेला छोड़कर 
पर फिर भी हर चिड़िया अपने परिंदों को 
उड़ना सिखाती है 
देती है आशीर्वाद उचीं उड़ान भरने के लिए 
फिर क्यूँ बेठी है तू टकटकी लगाये 

                                 दिपगीरी

शनिवार, 7 मई 2011

श्रधांजलि

माँ मुझे बहुत प्यारी थी 
पर वक़्त  ना बिताया इतना माँ के संग 
सदा इंतजार किया उस वक़्त का                          
जो बड़ा बेफवा  होता है हरदम 
पहले आगे की पदाई  के लिए 
हो गयी माँ से दूर मैं
पदाई  पूरी होते ही  शादी हो गयी मेरी
फिर हो गयी माँ से दूर मैं 
माँ बन कर बच्चो की परवरिश मैं
बीत गया समय पंख लगाकर 
बच्चो को पढने के लिए बाहर भेजा
तब हुआ अहसास माँ से दूर होने का 
सोचा अब वक़्त  मेरे साथ वफ़ा करेगा 
माँ के साथ अब वक़्त बिताउंगी
बचपन का सारा प्यार अब मैं पाऊँगी 
पर भगवान को भी माँ की जरुरत थी 
माँ को अपने पास बुला लिया 
वक़्त ने मुझे फिर रुला दिया
पर अब हर बेटी को मेरा ये सन्देश है 
वक़्त का ना करना इंतजार 
माँ के प्यार को कभी ना देना खोने 
अनमोल है माँ का प्यार 
एक बेटी के दिल से निकली 
एक माँ के लिए सच्ची  श्रधांजलि 
माँ  अगले जनम में मैं आपकी ही बेटी बनूँ 
           विज्जू (दीप गिरी )

शुक्रवार, 6 मई 2011

माँ


                                                            
            माँ    देवी  है  पवित्रता  का रूप 
            माँ  धरती है सब्र  का  प्रतिरूप 
            माँ  सागर है  सच्चे  प्यार  का 
            माँ रूप है साहस और वीरता का 
           माँ मूर्ति है सादगी और त्याग की 
           माँ राह है  अटल  सच्चाई  की 
          माँ वृक्ष  है  प्यार  की  छाँव  का  
          माँ  ठण्ड में सूरज की  गर्मी  है 
          माँ गर्मी में चांदनी की ठंडक है 
          माँ जीवन  है  हम  बच्चो  का 
            माँ  ही   हमारी   हमराज   है 
          माँ   में हमारा   बचपन      है 
         माँ  तुझसे  ही  यह  जीवन है