रविवार, 10 मई 2020

मां

             मां 

"मां " इस शब्द में है खुशियां सारी
मां   बहुत याद आती है तुम्हारी
अभी बहुत समय  है  ये सोचकर
समय नहीं बिताया साथ तुम्हारे
समय कब ले गया सपने हमारे
मां  बहुत याद आती है तुम्हारी
हर जन्म तुम ही मां हो हमारी
अब यही विनती प्रभु से है हमारी
मां सच कह रहे है सुन लो हमारी
मां बहुत याद आती है तुम्हारी
"मां " इस शब्द में है खुशियां  सारी

बुधवार, 11 अक्टूबर 2017


                                                                             
                                           दीपावली 
                                                  
              फिर   आयी     दीपावली     माँ     हुई     ख़ुशी   से    बावली 
                बच्चो     की        रौनक     होगी        हमारे     अंगना 
              खन    खन        करेंगे       बहु    बेटी     के       कंगना  
             बच्चों  के   खिलखिलाने से  तुम्हे   भी   मिलेगा   सकून 
             खिल उठेगा  ये  बाग़  और   झूमने   लगेगा     बागबान 
            इन्      महानगरों     ने   अपना  चमन    चमकाया    है   
            हमारे    दीपको    की      चमचमाती     रोशनियों   से 
            माँ  पापा  ही   नहीं   पूरा कुटुंब  तुम्हे   याद  करता   है 
            याद     करती     है    तुमको      ये     रौनके    बाज़ार 
            दीपावली    भी      पूरा वर्ष     इन्तजार       करती है
           देखने  को   अपने   दीपको    की     चमचमाती  कतार  
          फिर       आयी    दीपावली    माँ    हुई    ख़ुशी   से बावली 
          

रविवार, 12 मई 2013

मेरी प्यारी  माँ ,
 एक माँ  जिसने  जन्म दिया ,और पाल पोस कर बड़ा किया ,पढ़ाया  लिखाया और मेरी शादी करके मुझे एक और माँ  के पास भेज दिया ,साडी जिम्मेदारी उन्हें सोंप दी ,और उस मान ने मुझे और ज्यादा प्यार दिया ,हर तरह से मुझे प्रशिक्षित  किया ,कभी उस माँ की कमी महसूस नहीं होने दी -----आज "माँ दिवस "पर दोनों माओं  की बहुत याद  आ रही है ,इस  जन्म मैं बहुत गलतियां की बड़ो के प्यार को समझ न सके ,भगवान् अगले जन्म मैं फिर मौका दे और तनी अक्ल भी दे कि अपना फर्ज बखूबी  निभा  सकें ---मेरी दोनों माँ जहाँ भी हैं उन्हें मेरा प्रणाम --- 


बुधवार, 1 अगस्त 2012

अपनी कलम से

आज फिर कुछ लिखने को मन कर रहा है 
अपनी   कलम   से  दिल   का   हाल 
बयां  करने  का  मन  कर  रहा है 
खुद को एक  महल मैं बंद कर रखा था 
आज सब पिंजरे तोड़ उड़ने को मन कर रहा है 
आज  वादा  है  मेरा  खुद  से 
अपनी कलम को अपनी ताकत बनाउंगी
हर पल को इक यादगार लम्हा बनाउंगी 
जीवन अपना हमेशा समर्पित किया है
अब अपना  भी  कुछ  मुकाम  बनाउंगी 

रविवार, 12 फ़रवरी 2012

HAPPY VALENTINE DAY

क्या होता है  यह valentine day 
क्यों उठता  है  सवाल  इस  पर
इस व्यस्त  युग में खो गया है जो 
उस  प्यार  को  जताने  का 
एक ज़रिया है  valentine day 
उपहार जो मन को ख़ुशी  दे 
प्यार जो  हमेशा बढता रहे 
मन जो अपनी भावनाए कहे 
एसा अनोखा है ये valentine day 
HAPPY VALENTINE DAY

शनिवार, 3 सितंबर 2011

ठहराव

क्या नदिया  भी रुक जाना चाहती है 
क्या लहरें भी झुक  जाना चाहती है
बादल भी थक जातें है बरसकर 
तूफान भी लोट जाता है गरजकर 
जिंदगी भी चाहती है ठहराव
अब भिखरे हुए आँगन को 
समेटना चाहती है ये माँ
बाग़ मैं फैले  हुए फूलों की 
इक माला बनाना चाहती हूँ  
बच्चों को आँचल मैं छुपाना चाहती हूँ
अब इस बहाव को रोकना चाहती हूँ
हर नदी अब अपना रास्ता बदलकर 
इस सागर मैं आ जाये 
बस  यही चाहती हूँ मैं
बस इस जिंदगी का ठहराव
 चाहती हूँ मैं

रविवार, 29 मई 2011

उड़ान

जिंदगी ठहर सी गयी 
आशाएं भी सो गयी है 
परिंदे उड़ गए है                                                                            
चिड़िया टकटकी लगाये क्यों बेठी है 
चिड़िया ने एक एक दाना मुख मैं डाल
बड़ा किया अपने परिंदों को 
इस उम्मीद से क़ि वे बहुत उचीं
उड़ान भरेंगे आसमान मैं 
सबसे उचें रहेंगे सदा 
लेकिन अब क्यों तुम बेठी हो
टकटकी लगाये 
बरगद का ये पेड़ नहीं भाये अब उनको 
उचीं इमारतों क़ी अटरिया मैं 
घोसंला बनाया है तेरे परिंदों ने 
क्यूँ क्यूँ तुने उन्हें उड़ना सिखाया 
क्यूँ बेठी है तू अब टकटकी लगाये 
ये विशाल वृक्ष क्यूँ लगे तुझे सूना
जब आएगी मौसम मैं बहार 
तुझसे मिलने आयेंगे तेरे परिंदे 
कुछ पल खुशियों के तेरे दामन मैं डालकर 
फिर उड़ जायेंगे तुझे अकेला छोड़कर 
पर फिर भी हर चिड़िया अपने परिंदों को 
उड़ना सिखाती है 
देती है आशीर्वाद उचीं उड़ान भरने के लिए 
फिर क्यूँ बेठी है तू टकटकी लगाये 

                                 दिपगीरी