आज फिर कुछ लिखने को मन कर रहा है
अपनी कलम से दिल का हाल
बयां करने का मन कर रहा है
खुद को एक महल मैं बंद कर रखा था
आज सब पिंजरे तोड़ उड़ने को मन कर रहा है
आज वादा है मेरा खुद से
अपनी कलम को अपनी ताकत बनाउंगी
हर पल को इक यादगार लम्हा बनाउंगी
जीवन अपना हमेशा समर्पित किया है
अब अपना भी कुछ मुकाम बनाउंगी
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