जिंदगी ठहर सी गयी
आशाएं भी सो गयी है
परिंदे उड़ गए है
चिड़िया टकटकी लगाये क्यों बेठी है
चिड़िया ने एक एक दाना मुख मैं डाल
बड़ा किया अपने परिंदों को
इस उम्मीद से क़ि वे बहुत उचीं
उड़ान भरेंगे आसमान मैं
सबसे उचें रहेंगे सदा
लेकिन अब क्यों तुम बेठी हो
टकटकी लगाये
बरगद का ये पेड़ नहीं भाये अब उनको
उचीं इमारतों क़ी अटरिया मैं
घोसंला बनाया है तेरे परिंदों ने
क्यूँ क्यूँ तुने उन्हें उड़ना सिखाया
क्यूँ बेठी है तू अब टकटकी लगाये
ये विशाल वृक्ष क्यूँ लगे तुझे सूना
जब आएगी मौसम मैं बहार
तुझसे मिलने आयेंगे तेरे परिंदे
कुछ पल खुशियों के तेरे दामन मैं डालकर
फिर उड़ जायेंगे तुझे अकेला छोड़कर
पर फिर भी हर चिड़िया अपने परिंदों को
उड़ना सिखाती है
देती है आशीर्वाद उचीं उड़ान भरने के लिए
फिर क्यूँ बेठी है तू टकटकी लगाये
दिपगीरी
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जवाब देंहटाएंmain aapke paas jaldi wapas aa jaungi mumma papa ....
जवाब देंहटाएंi promise.....